Sunday, November 16, 2008

खाकी वर्दी की बेदर्दी

पुलिस महकमा आजकल लगातार विवादों में बना हुआ है,और विवादों में रहने का कारण उसकी बंदूक का गलत निशाना नहीं बल्कि गलत शख्स पर सही और सटीक निशाना है। हिन्दी फिल्मों में पुलिस अपने ढीले-ढाले रवैये और देर से पंहुचने के कारण बदनाम थी तो आजकल पुलिस की ज्यादा फुर्ती ही उसकी बदनामी का कारण बन रही है। राहुल राज को पकड़ने के बज़ाय, मुंबई पुलिस ने उसे गोलियों से भून देना ही बेहतर समझा। फुर्ती थी न उसके निर्णय में। लेकिन फुर्ती शारीरिक थी बौद्दिक नहीं। शारीरिक अंगो की चाल तो तेज थी लेकिन दिमाग वही शून्य और अंजाम फिर प्रश्न खड़े करने वाला।
घुटनों के नीचे पुलिस निशाना लगाना नहीं चाहती या फिर उसका निशाना घुटनों के नीचे लग नहीं रहा। किसी दोषी को पकड़ने के बजाय उसे मौत के घाट उतार देना ही अब हमारी पुलिस की नई तस्वीर है। हरियाणा के भिलाई में पुलिसवालों ने निर्दोष कुलदीप का एनकांउटर कर इस तस्वीर से सब को वाकिफ़ भी करवा दिया।
पुलिस की कार्यप्रणाली हमारे देश में लगातार सवालों के घेरे में आती रही है। चाहे वो भीड़ पर गोलियों से कहर बरपाने की ही बात क्यों न हो। ऐसा लगता है जैसे पुलिस के सिपाहियों को प्रैक्टिस के लिये सीधे मैदान पर उतारा जा रहा है, जहां वो अपना निशाना पैना करने के लिये आम आदमी पर लगातार प्रयोग कर रहे हैं। बार-बार पुलिसिया एनकांउटर पर सवाल उठना तो भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के लिये वाकई शर्म की बात है। क्या अब इस महकमे में किसी बदलाव की जरूरत नहीं नज़र आती ? आख़िर कब तक आम आदमी पुलिसिया कायरता का निशाना बनता रहेगा। ‘चेंज़’ की जरुरत तो है ही... चाहे वो पुलिस की कार्यप्रणाली में हो या उसकी इमेज़ में। आख़िर जनता के दिल से खाकी वर्दी और पुलिस शब्द का डर हटाना भी तो ज़रुरी है।

नितिन पाण्डेय FMCC

Student Blogging

Dear all,
It is interesting to note that at least some of you have started Blogging. Blogging is a great tool to improve writing. I am sure as soon as this item gets published I will be able to spot the mistakes in it and would feel embarrassed at having made them. I consider this to be an opportunity to learn. I would assume that you would also consider blogging as means to pin point your own mistakes and improve from them. Hence, I suggest that all of you should blog as much as possible. Happy blogging. Ravi